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डेनमार्क-भारत की वर्चुअल समिट: राजदूत ने बताया कैसे आगे बढ़ रहे हैं दोनों देश

नई दिल्लीः भारत- डेनमार्क के पीएम की वर्चुअल मुलाकात के एक दिन बाद डेनमार्क के राजदूत फ्रेडी स्वेन (Freddy Svane) ने Zee समूह के ग्लोबल चैनल Wion को इंटरव्यू दिया है. इस दौरान उन्होंने कहा कि वे वैश्विक श्रृंखला पहल (Global chain initiative) के विविधीकरण (Diversification) के लिए, उनका देश पूरी तरह से तैयार है. बता दें कि बीते दिन हुए वर्चुअल शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने वैकल्पिक और विविध वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की आवश्यकता के बारे में बताया था और कहा था कि कैसे भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया आपूर्ति श्रृंखला पहल के लिए एक साथ आ रहे हैं. 

इस दरौन डेनमार्क के दूत ने ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप (Green Strategic partnership) और भारत के पैमाने व डेनमार्क के कौशल एक साथ होने के कैसे दोनों देशों को फायदे होंगे, जैसे मुद्दों पर बातचीत की. इंटरव्यू में उन्होंने किम डेवी (Kim Davy) मुद्दे के बारे में भी बात की, जिसके बारे में भारत ने डेनमार्क संग हुए वर्चुअल शिखर सम्मेलन के दौरान उठाया था. बता दें कि कोविड-19 के प्रकोप के बीच भारत के पीएम का यह चौथा शिखर सम्मेलन था. 

बातचीत के दौरान जब फ्रेडी से पूछा गया कि भारतीय पीएम ने वर्चुअल समिट में कहा था कि कोविड-19 (Covid-19) ने दिखाया है कि वैश्विक आपूर्ति श्रंखला (Global Supply Chain) का किसी भी एक देश या स्रोत पर अत्यधिक निर्भर होना बेहद जोखिम भरा हो सकता है. इसी बीच पत्रकार ने यह सवाल भी किया है कि भारत, जापान (Japan) और ऑस्ट्रेलिया (Australia) के  ग्लोबल सप्लाई चेन की विविधता बरकरार रखने के साथ उसे लचीला बनाने के लिए साथ काम कर रहें हैं. इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

इसके जवाब में फ्रेडी ने कहा, ”सोमवार को सबसे पहले समिट के दौरान COVID 19 पर ही चर्चा हुई. दोनों देश के पीएम ने इस बात पर सहमति जताई कि अब महामारी का वैश्विक समाधान खोजने की जरूरत है जो लंबे समय तक रहने वाला है. हम सभी ने एक सीख ली है कि किसी भी संकट से निपटने के लिए और अधिक लचीला होने की जरूरत है.”

फ्रेडी ने कहा कि महामारी का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, तभी हमें लगा कि पारंपरिक वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं (Traditional Global Supply chains) जोखिम में हैं, लिहाजा हमें इस संकट को मिलकर ही कम करना होगा. इस संकट के उबरने के लिए भारत ने स्वाभाविक रूप से मुखर रहा है. जापान, भारत, ऑस्ट्रेलिया द्वारा उठाए गए कदमों को पहले ही देख चुके हैं और हमें भी इस पर विचार करने के लिए तैयार हैं. 

फ्रेडी ने पत्रकार के भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ काम करने पर अपनी प्रतिक्रिया दी. फ्रेडी ने कहा, ‘इसे स्पेसिफिक यानी विशिष्ट देशों के रिएक्शन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, यह वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर है और वैश्विक अर्थव्यवस्था से ही हम सब लाभान्वित होते हैं. कोई भी बिना वैश्विक अर्थव्यवस्था के नहीं रह सकता. यह बताकर खुशी हुई कि दोनों पीएम ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत यूरोपीय संघ के बीच एफटीए को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने की जरूरत है.  जो कुछ गलत हुआ उस पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, इस बात पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है कि हम चीजों को कैसे बदल सकते हैं और पूरे विश्व, भारत और डेनमार्क को लाभ पहुंचा सकते हैं, मैं इसे ऐसे ही देखता हूं.

गौरतलब है कि भारत और डेनमार्क के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार 30.49 प्रतिशत बढ़ गया है. 2016 में 2.82 बिलियन अमरीकी डॉलर से बढ़कर 2019 में 3.68 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया है. भारत में लगभग 200 डेनिश कंपनियों ने निवेश किया है जबकि डेनमार्क में 25 भारतीय कंपनियां आईटी, अक्षय ऊर्जा और इंजीनियरिंग क्षेत्र में कार्यरत हैं.

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