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इराक की जीवनधारा मानी जाने वाली नदियां तोड़ रही हैं दम, यह है वजह

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गृहयुद्ध झेल चुका इराक (Iraq) गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है. हालात ये हो चले हैं कि इराक के अधिकांश इलाकों में पीने के लिए शुद्ध पानी तक नहीं है.

इराक की यूफ्रेट्स और टाइग्रिस नदियां दम तोड़ रही हैं

बगदाद: गृहयुद्ध झेल चुका इराक (Iraq) गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है. हालात ये हो चले हैं कि इराक के अधिकांश इलाकों में पीने के लिए शुद्ध पानी तक नहीं है. स्थिति की गंभीर का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2018 में बसरा में सैंकड़ों लोगों को दूषित पानी पीने के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था. 

मुख्य रूप से यूफ्रेट्स और टाइग्रिस (Euphrates and the Tigris) नामक नदियां इराक की लाइफलाइन हैं, लेकिन अब दोनों नदियां सूखने लगी हैं. मौसम की मार और तुर्की से विवाद के चलते नदियों में पानी लगातार कम होता जा रहा है. हरे-भरे नजर आने वाले इलाके बंजर हो गए हैं और किसानों के लिए आजीविका चलाना भी मुश्किल होता जा रहा है. 

नहीं मिल रहा जरूरत का पानी 


पानी की कमी से बड़े पैमाने पर वन्य जीवन भी प्रभावित हुआ है. टाइग्रिस नदी जिसे दजला नदी भी कहते हैं, तुर्की के तोरोस पर्वतों के दक्षिणपूर्वी भाग से निकलकर दक्षिण-पूर्व इराक से होते हुए आगे निकल जाती है. तुर्की नदी पर तेजी से बांध बना रहा है, जिसकी वजह से इराक को जरूरत के हिसाब से पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है. वहीं, ईरान द्वारा बनाये जा रहे डैम ने भी इराक की परेशानी बढ़ा दी है. इराक के जल मंत्री मेहदी कल हमदानी ने कहा, ‘तुर्की और ईरान नदी पर बांध बना रहे हैं. इसके अलावा भी उनकी कई परियोजनाएं चल रही हैं, जिसकी वजह से नदी के प्रवाह में 50 फीसदी की कमी आई है. पहले की तुलना में हमें काफी कम पानी मिल रहा है’. 

दूसरे देशों से आस


स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इराक ने दूसरे देशों से जल समझौते पर बातचीत शुरू कर दी है. अंकारा और तेहरान के साथ उसकी बातचीत चल रही है. तुर्की के साथ भी वह विवाद सुलझाने में लगा है. हालांकि, इसकी संभावना बेहद कम है कि तुर्की से किसी तरह की राहत मिले. जिस तरह से इराक में जल संकट गंभीर होता जा रहा है, उससे आने वाले दिनों में पीने के पानी को लेकर जंग जैसे हालात निर्मित हो सकते हैं.   

दबाव भी एक रास्ता


इराक अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से तुर्की पर दबाव बना सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इराक को वैश्विक मंच पर तुर्की और ईरान द्वारा बनाये जा रहे बांधों का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाना चाहिए. अगर इससे बात नहीं बनती तो फिर इराक के पास केवल एक ही विकल्प रह जाता है और वो है तेल के बदले पानी. गौरतलब है कि इराक ओपेक का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है.  

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